पतंगबाज़ी सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि खुशियों, बचपन की यादों और अपनों के साथ बिताए पलों की खूबसूरत कहानी है। रंग-बिरंगी पतंगें, खुले आसमान और छतों पर गूंजती हँसी दिल को सुकून देती है। हर पतंग के साथ एक एहसास जुड़ा होता है, जो हमें फिर से उन सुनहरे दिनों में ले जाता है।
पतंगबाज़ी पर लिखी शायरी में मस्ती, दोस्ती, प्यार और जिंदगी के कई रंग मिलते हैं। ये शायरियां भावनाओं को आसान और सच्चे शब्दों में बयां करती हैं। इस संग्रह में आपको 70+ बेहतरीन पतंगबाज़ी शायरी मिलेंगी, जो हर दिल को छू जाएंगी और त्योहारों की रौनक बढ़ा देंगी
Patang Bazi Shayari – Bachpan Ki Yaadein
छत पर चढ़कर जो हँसी बिखर जाती थी,
वो बचपन की पतंग आज भी याद आती थी।
काग़ज़ की पतंग, सूत का डोर,
बचपन के दिन थे, खुशियों का शोर।
माँ की डाँट और पतंग की उड़ान,
बचपन था मेरा सबसे प्यारा आसमान।
पतंग के संग उड़ते थे सपने हजार,
मासूमियत थी तब दिल का इकरार।
छत की वो भीड़, दोस्तों की शान,
बचपन में ही समझा था जीत का मान।
टूटी पतंग भी खुशी दे जाती थी,
बचपन की हर चीज़ सच्ची लगती थी।
न मोबाइल था, न कोई बहाना,
पतंग ही था सबसे बड़ा खज़ाना।
सूरज ढले भी खेल न रुकता था,
बचपन पतंग संग खुलकर झुकता था।
वो किलकारी, वो शोर-शराबा,
बचपन में हर दिन लगता था ख़्वाब सा।
छत से छत तक रिश्ते जुड़ जाते थे,
पतंग के धागे दिल से दिल मिलाते थे।
बचपन की हर जीत खास थी,
क्योंकि पतंग हमारे पास थी।
वो दिन अब लौटकर आए ना आए,
पर पतंग की याद दिल में बस जाए।
कटी पतंग पर भी जश्न होता था,
बचपन सच में जादू होता था।
वो रंगीन काग़ज़ की पहचान,
बचपन था मेरा खुला आसमान।
दोस्त, पतंग और मीठी धूप,
बचपन था खुशियों का सच्चा रूप।
हर लूट एक नई कहानी थी,
बचपन की दुनिया कितनी सुहानी थी।
पतंग उड़ाते उड़ाते बड़े हो गए,
मासूम ख्वाब कहीं पीछे रह गए।
आज भी छत देख मन भर आता है,
बचपन हर पतंग संग लौट आता है।
वो समय था जब दिल हल्का था,
पतंग उड़ाना ही सब कुछ था।
बचपन की पतंग आज भी उड़ती है,
यादों की हवा में दिल को छूती है।
Patang Bazi Shayari – Dosti Aur Masti
दोस्त संग पतंग, हाथ में डोर,
छत पर मस्ती, हँसी का शोर।
पतंग से ज़्यादा दोस्त काम आए,
हर हार में भी साथ निभाए।
जीत हो या पतंग कट जाए,
दोस्ती हर हाल में मुस्काए।
दोस्त बोले “ढील दे ज़रा”,
पतंग ने भी बात मानी सदा।
एक डोर, कई हाथ जुड़े,
दोस्ती के रंग और गहरे हुए।
दोस्त की पतंग जब ऊपर जाए,
दिल भी खुशी से उड़ जाए।
हारने पर दोस्ती हँसती थी,
जीतने पर और खिलती थी।
छत की भीड़ और दोस्त पास,
पतंगबाज़ी बनी खास एहसास।
दोस्त संग हर पतंग याद बन गई,
हर मस्ती एक सौगात बन गई।
पतंग से पहले दोस्त जरूरी था,
तभी तो हर पल खुशनुमा था।
दोस्त की जीत अपनी सी लगी,
पतंग नहीं, दोस्ती बड़ी लगी।
साथ में डोर थामे रहे,
दोस्ती के आसमान में उड़ते रहे।
दोस्ती की डोर कभी टूटी नहीं,
पतंग चाहे जितनी भी कटी सही।
छत पर दोस्त, हाथ में मांझा,
जिंदगी का सबसे मीठा सांचा।
दोस्त हँसे तो जीत पक्की,
पतंग खुद-ब-खुद ऊँची टिकी।
दोस्ती में हार भी हँसी थी,
यही तो सच्ची खुशी थी।
पतंगबाज़ी ने दोस्त बनाए,
ज़िंदगी भर के साथ निभाए।
हर लूट पर दोस्त चीख पड़े,
वही पल दिल में अमर गढ़े।
दोस्त संग पतंगबाज़ी का मज़ा,
जिंदगी में फिर न आया दुबारा।
दोस्ती की पतंग आज भी उड़ती है,
यादों की हवा में दिल से जुड़ती है।
Patang Bazi Shayari – Ishq Aur Ehsaas

तेरी याद भी पतंग सी उड़ती है,
दिल की डोर हर बार मुझसे जुड़ती है।
मोहब्बत की पतंग बड़ी नाज़ुक थी,
ज़रा सी हवा में कट गई थी।
तुझे देखा तो दिल उड़ गया,
जैसे आसमान में पतंग छूट गया।
इश्क़ की डोर संभाल न पाए,
ख्वाब सारे कटकर गिर जाए।
तेरी मुस्कान पतंग बन गई,
दिल की छत पर उतर गई।
प्यार भी मांझे जैसा तेज़ निकला,
दिल को छूकर आगे निकल गया।
तेरी यादों की पतंग उड़ाता हूँ,
हर शाम तुझे ही पाता हूँ।
इश्क़ की बाज़ी भी पतंग सी थी,
कभी ऊँची, कभी कटी सी थी।
तू हवा बनकर आई थी,
मेरी पतंग आसमान ले गई थी।
मोहब्बत में भी पतंगबाज़ी हुई,
किसी की जीत, किसी की हार हुई।
दिल की डोर तेरे हाथ में दी,
तूने भी पतंग ऊँची रखी।
तेरे बिना हर उड़ान अधूरी है,
मेरी पतंग भी आज मजबूरी है।
इश्क़ का खेल आसान नहीं,
हर पतंग आसमान नहीं।
तेरी याद की पतंग कटती नहीं,
दिल से कभी हटती नहीं।
प्यार भी छत पर लड़ा गया,
दिल भी पतंग सा कट गया।
तेरे साथ उड़ान कुछ खास थी,
हर पतंग जीत की आस थी।
मोहब्बत में भी शोर मचा,
दिल ने पतंग की तरह उड़ा।
तू पास हो तो हवा साथ दे,
मेरी पतंग हर बाज़ी मात दे।
तेरी यादों की डोर मजबूत है,
इसलिए दिल आज भी सुरक्षित है।
इश्क़ की पतंग आज भी उड़ती है,
तेरे एहसासों में डूबी रहती है।
Patang Bazi Shayari – Jeet, Josh Aur Zindagi
पतंग सिखाती है उड़ना कैसे,
हार के बाद फिर उठना जैसे।
जो डोर थामे, वही बाज़ी जीते,
जिंदगी भी ऐसे ही सबक देते।
ऊँचा उड़ना आसान नहीं,
संभालना भी जरूरी है कहीं।
हर कट से सीख मिलती है,
जीत यूँ ही नहीं मिलती है।
हवा बदले तो चाल बदलो,
जिंदगी में आगे ही चलो।
पतंग की तरह सपने उड़ाओ,
डर को मांझे से काट जाओ।
जीत का मज़ा तभी आता है,
जब मेहनत साथ निभाता है।
जो गिरकर भी फिर उड़ जाए,
वही असली पतंगबाज़ कहलाए।
जिंदगी भी पतंगबाज़ी है,
कभी जीत, कभी बाज़ी है।
मजबूत डोर, साफ़ इरादा,
हर आसमान बनेगा ज्यादा।
हार से मत घबराना दोस्त,
अगली उड़ान होगी सबसे जोश।
जो ऊँचाई से डर जाए,
वो पतंग कभी चमक न पाए।
जीत का नशा अलग होता है,
जब पतंग सबसे ऊपर होता है।
हर उड़ान नया सबक सिखाए,
जिंदगी भी यही दोहराए।
मांझा तेज़ हो या हवा साथ,
जीत मिलती है सही हाथ।
पतंग कहती है कोशिश कर,
आसमान खुद झुक जाएगा इधर।
हार भी मुस्कुरा कर सह लो,
अगली बाज़ी में फिर कह दो।
उड़ते रहो, रुकना मत,
जिंदगी में डरना मत।
जीत सिर्फ आसमान की नहीं,
हौसलों की भी पहचान है यही।
पतंगबाज़ी से सीखा हमने,
गिरकर उठना जिंदगी में।
Frequently Asked Questions
पतंगबाज़ी शायरी क्या होती है?
पतंगबाज़ी शायरी में पतंग, आसमान और भावनाओं को खूबसूरत शब्दों में पिरोया जाता है।
क्या पतंगबाज़ी शायरी त्योहारों के लिए सही है?
हाँ, मकर संक्रांति और बसंत पंचमी जैसे त्योहारों के लिए यह बिल्कुल उपयुक्त है।
क्या ये शायरी सोशल मीडिया पर इस्तेमाल की जा सकती हैं?
जी हाँ, ये शायरियां Instagram, WhatsApp और Facebook के लिए परफेक्ट हैं।
क्या पतंगबाज़ी शायरी बच्चों के लिए भी ठीक है?
हाँ, अधिकतर पतंगबाज़ी शायरी सरल और पारिवारिक होती हैं।
पतंगबाज़ी शायरी किस भावना को दर्शाती है?
यह खुशी, आज़ादी, दोस्ती, प्यार और बचपन की यादों को दर्शाती है
Conclusion
पतंगबाज़ी शायरी दिल को छूने वाली भावनाओं से भरी होती है, जो हमें बचपन, त्योहारों और खुली छतों की याद दिलाती है। रंगीन पतंगों की तरह ये शायरियां भी जीवन में खुशियों के रंग भर देती हैं और हर मौसम को खास बना देती हैं।
इस संग्रह की 70+ पतंगबाज़ी शायरी दोस्ती, प्यार और जिंदगी के हर एहसास को आसान शब्दों में पेश करती हैं। चाहे त्योहार हो या सोशल मीडिया पोस्ट, ये शायरियां हर पल को यादगार बनाने के लिए एकदम परफेक्ट हैं।

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